कांवड़ यात्रा : उद्योगों, व्यापारियों और सरकार को अरबों का नुकसान

लगभग 6 करोड़ से अधिक कांवड़ियां चलेंगे जल लेकर, प्रशासन ने किए सुरक्षा के कड़े प्रबंध, गाजियाबाद से हरिद्वार तक रास्ते बंद, जनता परेशान



अजय जैन गाजियाबाद। प्रत्येक वर्ष कांवड़ियों बढ़ती संख्या के कारण दिल्ली से लेकर हरिद्वार तक लगभग 15 दिन तक । कांवड़ियों का जोर रहता है क्योंकि प्रत्येक वर्ष कांवड़ियों की संख्या बढ़ती जा रही । वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस बार की कांवड़ यात्रा कुंभ मेले की तरह होनी चाहिए। तथा कांवड़ियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। जिसके कारण पुलिस व प्रशासन किसी खतरे से निबटने के लिए पूरे रास्ते बंद कर देती है। क्योंकि किसी भी कांवड़िये को नुकसान होने पर वे लोग एकत्रित होकर अराजकता पर उतर आते बार हैं जिससे माल व जनहानि दोनों का ही रहा खतरा बना रहता है। ये 15 दिन पुलिसतक प्रशासन के लिए परीक्षा का समय होता प्रत्येक है और पुलिस-प्रशासन इसमें असफल रही न होने की योजना को लेकर चारों तरफ योगी का रास्ता बंद करके अपने कार्य को सफल बनाने का प्रयास करते हैं।



होनी इस बार प्रशासन के अनुसार लगभग 4 करोड़ से अधिक कांवड़ियां जल लेकर । आ रहे हैं। जिसके कारण प्रशासन ने इस किसी बार 25 जुलाई से ही रास्ता पूर्णतः बंद रास्ते कर दिया है। इस बार प्रशासन कुछ ज्यादा ही सख्ती अपना रहा है। अभी पूर्व में गाजियाबाद पुलिस MRA MCA । । लाइन में एडीजी और मुख्य सचिव ने आसपास मंडल के आईजी, डीआईजी एवं सभी जनपदों के कप्तानों की बैठक लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए थे कि इस रूट पर कोई अप्रिय घटना घटित न होने पाए जिसके लिए सभी जिलाधिकारी व एसएसपी अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध करें। चारों तरफ रास्ते बंद होने के कारण जनता, उद्योगपतियों, व्यापारियों, बीमारों आदि लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना उठाना पड़ता है वहीं व्यापार व उद्योगधंधे पूर्णतः कांवड़ियों के भेंट चढ़ जाते हैं जिसके कारण उन्हें अरबों रूपए का नुकसान उठाना पड़ता है। यही नहीं इनको नुकसान के साथ-साथ सरकार को भी राजस्व के रूप में एवं सरकारी मशीनरी का कांवड़ के कार्यों में उपयोग करने से करोड़ों रूपए का राजस्व के रूप में जहां नुकसान होता है वहीं सरकारी मशीनरी भी पूर्णतः इसकी भेंट चढ़ जाती है। दिल्ली-हरिद्वार मार्ग बंद होने के कारण अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए जनता को दूर-दराज के रास्तों से होते हुए लंबी दूरी तय करनी पड़ती हैजिसके कारण समय के साथ-साथ धन का एवं डीजल पेट्रोल का अधिक खर्च होता है। गाजियाबाद से लेकर हरिद्वार तक के रास्ते पर भारी वाहनों का आवागमन पूर्णतः अवरूद्ध कर दिया गया है जिसके कारण इन वाहनों को घूम करके जाना पड़ता है जिसके कारण अधिक ईंधन की खपत होती है। जिसके कारण किराया बढ़ जाता है और जनता पर अतिरिक्त भार पड़ता है। यही नहीं रूट डायवर्जन के कारण अन्य रास्तों पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। जिसके कारण जनता त्राहि-त्राहि करती रहती है और सरकार व कांवड़ियों को मन ही मन कुछ न कुछ कहती रहती हैं। गाजियाबाद में विजयनगर बाईपास पर प्रतिदिन वैसे ही जाम जैसी स्थिति रहती है। अब रूट डायवर्जन के बाद वहां से निकलना एक टेढ़ी खीर हो गया है। सरकार ने कई वर्ष पहले गंगनहर के किनारे से कांवड़ियों के लिए रास्ता बनाया था जो कि अब चालू हो चुका है। जिससे कुछ यातायात में जरूर राहत मिली है। इस रास्ते से करोड़ों की संख्या में कांवड़ियें आ जा रहे हैं जिसके बावजूद भारी वाहनों के लिए आम रास्ता अब भी पूर्णत: बंद है। रास्ते बंद होने के कारण गाजियाबाद से हरिद्वार तक के बीच पड़ने वाले शहर व कस्बों के उद्योग धंधे व व्यापार पूर्णतः एक सप्ताह के लिए बंद हो जाते हैं जिससे की सरकार को राजस्व के रूप में अरबों रूपए का नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं जनता को भी काम बंद के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन इन सबके पीछे आम राय यह है कि रास्ते बंद होने का मुख्य कारण जनता ही है। क्योंकि दिनोंदिन एक-दूसरे को देखते हुए जहां कैम्पों की संख्या बढ़ रही है वहीं कांवड़ियों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो रही है। रास्ते बंद होने के कारण गाजियाबाद से हरिद्वार के बीच पड़ने वाले शहरों के मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है क्योंकि अगर किसी व्यक्ति को हार्ट-अटैक पड़ता है तो वह दिल्ली जाने के लिए सीधे-रास्ते से न जाकर बहत लम्बे रास्ते से उसे जाना पड़ता है। जिसके कारण पूर्व गत वर्षों में कई मरीजों की जान भी जा चुकी है। कांवड़ियों की ओट में असामाजिक तत्वों की भी मौज आ जाती है। विश्वसनीय सूत्रों के अनसार कछ असामाजिक तत्व कांवडियों के वेश में हरिद्वार व तराई के क्षेत्रों से नशीले पदार्थों की तस्करी करते हैं। लेकिन कांवड़ियों के भेष में होने के कारण पलिस व प्रशासन उन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जा पाता है क्योंकि अगर जिस पर उन्होंने हाथ डाला है वह अगर तस्कर नहीं हुआ तो पुलिस व प्रशासन को लेने के देने पड़ सकते हैं। यही कारण है कि पुलिस व प्रशासन भी कान में तेल डालकर सोता रहता है। अब देखना यह है कि इस बार पुलिस व प्रशासन किस प्रकार की व्यवस्था करता है। जिससे जनता को अधिक परेशानी न हो। क्योंकि रूट डायवर्जन के कारण बसों के किराए भी बढ़ जाते हैं। जिससे जनता पर अतिरिक्त भार व समय की बर्बादी होती है।